_*देवी माहात्म्य ( दुर्गासप्तशती पाठ )*_ *अध्याय - 07* इस अध्याय में–( चण्ड और मुण्ड का वध ) *ऋषि कहते हैं–*‘तदनन्तर शुम्भ की आज्ञा पाकर वे चण्ड-मुण्ड आदि दैत्य चतुरंगिणी सेना के साथ अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित हो चल दिये। फिर गिरिराज हिमालय के सुवर्णमय ऊँचे श…
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नवरात्र का षष्ठम दिवस माता का छठा स्वरूप - *माँ कात्यायनी* माँ दुर्गाजी के छठवें स्वरूप का नाम कात्यायनी है | इनका कात्यायनी नाम पड़ने की कथा इस प्रकार है – कत नामक एक प्रसिध्द महर्षि थे | उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए | इन्ही कात्य के गोत्र में विश्वप्रसिध्द महर्षि…
_*।। माँ कात्यायनी नमोऽस्तुते ।।*_ माँ दुर्गा द्वारा अपने भक्तों के व लोकमंगल के लिए विभिन्न चरित्र किए जाते हैं। माँ की प्रत्येक लीला मानव जीवन को कुछ विशेष संदेश प्रदान करती हुई अपने भक्तों के कल्याण के लिए ही होती हैं। ऐसे ही माँ दुर्गा द्वारा रक्तबीज असुर…
_*देवी माहात्म्य ( दुर्गासप्तशती पाठ )*_ अध्याय–06 इस अध्याय में–( धूम्रलोचन-वध ) *ऋषि कहते हैं–*‘देवी का यह कथन सुनकर दूत को बड़ा अमर्ष हुआ और उसने दैत्यराज के पास जाकर सब समाचार विस्तार पूर्वक कह सुनाया। दूत के उस वचन को सुनकर दैत्यराज कुपित हो उठा और दैत्य…
_*रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।*_ _*त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति।।*_ देवि ! तुम प्रसन्न होने पर सब रोगों को नष्ट कर देती हो और कुपित होने पर मनोवाँच्छित सभी कामनाओं का नाश कर देती हो । जो लोग तुम्हार…
_*ब्रह्मा यस्यै हरिर्यस्यै रुद्रो यस्यै व्यधान्नम:।*_ _*नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।*_ जिस जगदम्बा को ब्रह्मा, हरि (विष्णु) और रुद्र ने प्रणाम किया था उसे प्रणाम है, प्रणाम है, प्रणाम है 🙏🙇।
*शुम्भ ने कहलवाया है–*‘सम्पूर्ण त्रिलोकी मेरे अधिकार में है। देवता भी मेरी आज्ञा के अधीन चलते हैं। सम्पूर्ण यज्ञों के भागों को मैं ही पृथक्-पृथक् भोगता हूँ। तीनों लोकों में जितने श्रेष्ठ रत्न हैं, वे सब मेरे अधिकार में हैं। देवराज इन्द्र का वाहन ऐरावत जो हाथिय…
जो देवी सब प्राणियों में भ्रान्ति रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारंबार नमस्कार है। जो जीवों के इन्द्रिय वर्ग की अधिष्ठात्री देवी एवं सब प्राणियों में सदा व्याप्त रहने वाली हैं, उन व्याप्तिदेवी को बारंबार नमस्कार है। जो देवी चैतन्यरूप से इ…
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