सूर्येण घनमायं तिमिरं विलीयते। तथैव वेदसूर्येण मायावादो नष्टमद्वितम्। धर्मप्रकाशं पुनः पतितं, अज्ञानद्वारिणं। वेदमार्गे दीप्यमानं पुनः तं कर्तारं दयानन्दम्॥ जिस प्रकार घने काले मेघों को प्रकाशमान सूर्य अपने तेज से विलीन कर देता है, उसी प्रकार वेदसूर्य, तत्वचक्…
Ś𝐚ṅ𝐤𝐚𝐫 𝐒𝐯ā𝐦ī 𝐁𝐡āṣ𝐲𝐚 𝐕𝐢𝐡ā𝐫
频道हमारा उद्देश्य शंकर स्वामी द्वारा प्रतिपादित अवैदिक दृष्टिकोणों और तत्त्वों का तर्कसंगत खंडन करना है। विशेष रूप से, उनके द्वारा कपिलमुनि कृत सांख्य और न्याय-वैशेषिक के परमाणुवाद का जो खंडन किया गया, उसका निराकरण करना है।
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💥 नवीन वेदांती मुख मर्दनम् 💥 🍀नवीन वेदान्तियों की मति को शतधा प्रणाम है, जो शिशु अवस्था से परे बढ़ने का प्रयास नहीं करती। जैसे शिशु केवल मधुर पदार्थों की ओर आकर्षित होता है और कटु औषधि के सेवन से अशान्त हो जाता है, वैसे ही ये भी वही सुनना और मानना पसंद करते है…
आलोचना:- शांकर स्वामी का यह कहना ठीक नहीं क्योंकि सांख्य तो ईश्वर को सर्वज्ञ मानता है:- स हि सर्ववित् सर्वकर्ता। (सां० ३/५६) वह ईश्वर सर्वज्ञ और सब उत्पन्न पदार्थों का कर्ता है। जीवों के अनेक मानने से ईश्वर के सर्वात्मत्व का खण्डन भला कैसे हो गया? मनु जी का ज…
क्या मनु महराज ने कपिल मुनि की निन्दा की है? तैत्तिरीय संहिता में मनु महराज की प्रशांसा की गई है कि:- जो कुछ मनुः ने कहा वह औषधि है। मनु ईश्वर को सर्वात्मा सब में ओत प्रोत मानते हैं। इसलिये मनु के अनुसार भी कपिल निन्दनीय हैं। क्योंकि कपिल सर्वात्मा नहीं मानते।…
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यहां सांख्यवादी दर्शन के अनुसार तीन गुणों वाले प्रधान का तात्त्विक अर्थ नहीं लिया गया है। अव्यक्त शब्द का प्रयोग यौगिक रूप में किया गया है, जिसका अर्थ है—जो व्यक्त नहीं हुआ है। जो वस्तु किसी विशेष रूप में स्थिर न हो, वह अव्यक्त हो सकती है, अर्थात वह सूक्ष्म या…
श्रीयुक्त शंकराचार्यजी महाराज न केवल भारतवर्ष के, बल्कि सम्पूर्ण संसार के महानतम दार्शनिकों में एक गौरवमयी स्थान रखते हैं। उनके योगदान और ज्ञान का सम्मान करते हुए, हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमारा उनसे कोई द्वेष नहीं है। हमारा उद्देश्य केवल उनके द्वारा प्र…
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